रविवार, 2 नवंबर 2014

क्यूँ / kyun

मिजाज़ बदल जाते है मौसम की तरह ।
Mizaz badal jaate hai mausam ki terah
प्यार बदल जाते है पैरहन की तरह ।
Pyar badal jaate hain pairhan ki terah
भरोसा रहा नहीं दोस्त, दोस्ती का भी अब।
Bharosa raha nahi dost, dosti ka bhi ab
के दुश्मन मिलने लगे है दोस्तों की तरह ।
Ke dushman milne lage hain doston ki terah
बच बच के चला हूँ अपनों से परायों से।
Bach bach ke chala hoon apno se parayon se
तब निकली है ये मेरी उमर किसी तरह ।
Tab nikli hai ye meri umar kisi terah
जीना है मजे में तो ये फन सीख लो ।
Jeena hai maje meun to ye fan seekh lo
दिल को बना लो किसी पत्थर की तरह ।
Dil ko bana lo kisi patthar ki terah
उस आदमी का कोई मतलब रहा होगा ।
Us aadmi ka koi matlab reha hoga 
मीठी बाते कर रहा था शक्कर की तरह ।
Meethi baaten ker reha tha shakkar ki terah
बच्चों नें ही उसको घर से बेदर कर दिया 
Baccho ne hi usko ghar se be dar kar diya
काम जिनके लिए किया उम्र भर खच्चर की तरह ।
Kaam jinke lie kiya khchchar ki terah
कान्हा की बांसुरी की धुन सी थी कभी मेरी बातें ।
Kaanha ki baansuri ki dhun si thi kabhi meri baaten
अब चुभने लगी उसे किसी नश्तर की तरह
Ab chubhne lagi use kisi nashtar ki terah
जिन्दगी की आज कल क्या कद्र रह गयी ।
Jindgi ki aajkal kya kadr reh gayee
मरते है रोज़ सैकड़ो मच्छर की तरह 
Marte hai roz saikdo macchar ki rerah
*********शिवराज****************
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