शुक्रवार, 3 जुलाई 2015

शुभरात्री


सुबह से अपना कर्त्यव्य निभा रहा हूँ ।
जिंदगी की चक्की में पिसा जारहा हूँ ।
शाम ढल चुकी, रात जवां होने को है ।
मुझको विदा करो मैं सोने जा रहा हूँ ।
---शुभरात्री मित्रो---
आप का शिवराज
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