शुक्रवार, 26 सितंबर 2014

ख़्वाब

ख्वाब
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ये मासूम चेहरा हल्की  सी हंसी ।
किसी नौजवां के ख्वाब सी हो ।
दिन हो तो आफ़ताब सी हो तुम।
और रात चढ़े माहताब सी हो ।

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