शुक्रवार, 1 मई 2015

उदासी




यूं ही कभी भी चली आती है 
मेरे पास 
उदासी ।
अपना दोस्त समझकर 
और मैं 
उसका दिल नहीं तोड़ पता 

और फिर ........

कही ये मुझसे रूठी 
तो कौन आयेगा 
मेरे साथ वक़्त बिताने 
हाँ पसंद है 
मुझे भी
उदासी 
क्योकि साथ देती है 
मेरे गम में 
निस्वार्थ उदासी 
---शिवराज
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