सोमवार, 18 मई 2015

शानबाग को सलाम

पूरे बयांलिस बरस 
तीन बाय छ के घर में 
जवानी से बुढ़ापे तक 
सांस सांस को तरस
लड़ी जिंदगी की जंग 
रही फिर भी सरस
दिखा दी नारी शक्ति
बरसाया शौर्य रस 
आज जब विलीन हुई 
कह गयी अब बस 
बस करो ये घिनौनापन 
वरना जाओगे तरस 
फिर कौन बरसायेगा 
तुम पर प्रेम रस 
रहेगा याद मुझे 
तेरा अदभुत् संघर्ष 
अरुणा रविन्द्रन शानबाग 
तुम तो हो प्रेरक 
जिन्दा रहोगी दिलों में 
बन के एक दीपक 
आज अंतिम पलो में 
सर तेरे चरणों में रख 
करता हूँ दंडवत प्रणाम 
तुझे सलाम तुझे सलाम 
----शिवराज--------
Picture courtesy Google
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