एक भूल थी या उसे कोई खता बता दूं ।
क्यों चाहा था मैंने प्यार तुझ पे जता दूं ।
दिल धड़कता था जब से आया दुनियां में ।
जाने क्या सूझी की इसकी कोई वजह दूं ।
कभी कभी आता है ये ख्याल भी मन में ।
तेरी बेरुखी की क्यों खुद को मैं सजा दूं ।
एक बार जो तू सामने आये तो ही पता चले ।
के दिल खोल बददुआ दूं तुझे या के दुआ दूं
-------शिवराज----
लाल गुलाबी रंगो की होली खूब मनाई आप ने ।
क्या कभी दिल की कालिख भी हटाई आप ने ।
कितना गहरा रंग लगाया लेकिन उतर जाएगा ।
ता उम्र खिली रहती जो होती प्रीत लगाई आप ने ।
क्या त्यौहार मनाना सिरफ़ एक दिन के वास्ते ।
सीख़ अग़र बच्चों को इनकी न सिखाई आप ने
---शिवराज------
मेरी जिंदगी की बस इतनी सी कहानी है ।
हंसी लब पे झूठी सच आँख का पानी है ।
जिस पे भरोसा होगा तोड़ेगा वही उसको ।
ये बात न समझ आई है और न आनी हैं ।
प्यार इश्क़ वादा वफ़ा इकरार लगावट ।
ये सारी बाते बस जमाँ खर्च जबानी है ।
एक झूठ को सच जाना कहलाया दीवाना मैं ।
तुम को भी लगा होगा वो मेरी दीवानी है ।
हम साथ साथ खेले हाथों में हाथ ले ले ।
ये बचपन की यादें हैं अब दौर ए जवानी है ।
रुसवा न हो इश्क़ ज़माने में किसी तरह् ।
उल्फ़त की सभी रस्मे मुझको निभानी है ।
जब चाहा पूछना मुह मोड़ने का सबब ।
मुह मोड़ के बोले हम लोग ख़ानदानी हैं।
====शिवराज=======