गुरुवार, 14 मई 2015

बड़ा दिल रखता हूँ


वैसे चाहे मैं कितना भी सबर रखता हूँ ।
चोरी चुपके मग़र उसकी ख़बर रखता हूँ ।

खामोश रहता हूँ मगर अंजान नहीं हूँ मैं।
अपने हों या पराए सब पे नज़र रखता हूँ ।

कोई मिले मुझसे तो अपनापन लगे उसे।
इसलिए मैं अपनी "मैं" को घर रखता हूँ ।

भगवान है ये बात मानता नहीं हूँ मैं ।
माँ बाप के कदमों में मगर सर रखता हूँ ।

ये बात मुझको पापा ने सिखाई थी कभी ।
आदमी छोटा हूँ बड़ा दिल मगर रखता हूँ ।

------शिवराज---------
मेरे पिता को समर्पित

रविवार, 3 मई 2015

कुछ बदले




इतना तो कर दे ए खुदा की मेरे दिन बदले ।
न मैं बदला न वो बदले न मेरे अरमां बदले ।

आता नहीं समझ ये फ़साना कभी मुझको ।

अकेले में मिलते है वो, तो कुछ बदले बदले ।

इतना न इम्तिहान ले के बदल जाएं हम ।

अब के बदले तो मुश्किल है, फिर बदले ।

न जाने क्यों उम्मीद अभी बाकी है आप से ।

कोशिश में मैं भी साथ हूँ कुछ फ़िज़ा बदले ।

|~|~|~शिवराज~|~|~|

शुक्रवार, 1 मई 2015

उदासी




यूं ही कभी भी चली आती है 
मेरे पास 
उदासी ।
अपना दोस्त समझकर 
और मैं 
उसका दिल नहीं तोड़ पता 

और फिर ........

कही ये मुझसे रूठी 
तो कौन आयेगा 
मेरे साथ वक़्त बिताने 
हाँ पसंद है 
मुझे भी
उदासी 
क्योकि साथ देती है 
मेरे गम में 
निस्वार्थ उदासी 
---शिवराज