शनिवार, 7 मार्च 2015

होली


लाल गुलाबी रंगो की होली खूब मनाई आप ने ।
क्या कभी दिल की कालिख भी हटाई आप ने ।

कितना गहरा रंग लगाया लेकिन उतर जाएगा ।
ता उम्र खिली रहती जो होती प्रीत लगाई आप ने ।

क्या त्यौहार मनाना सिरफ़ एक दिन के वास्ते ।
सीख़ अग़र बच्चों को इनकी न सिखाई आप ने 
---शिवराज------

बुधवार, 4 मार्च 2015

कहानी




मेरी जिंदगी की बस इतनी सी कहानी है ।
हंसी लब पे झूठी सच आँख का पानी है ।

जिस पे भरोसा होगा तोड़ेगा वही उसको ।
ये बात न समझ आई है और न आनी हैं ।

प्यार इश्क़ वादा वफ़ा इकरार  लगावट । 
ये सारी बाते बस जमाँ खर्च जबानी है ।

एक झूठ को सच जाना कहलाया दीवाना मैं ।
तुम को भी लगा होगा वो मेरी दीवानी है ।

हम साथ साथ खेले हाथों में हाथ ले ले ।
ये बचपन की यादें हैं अब दौर ए जवानी है ।

रुसवा न हो इश्क़ ज़माने में किसी तरह् ।
उल्फ़त की सभी रस्मे मुझको निभानी है ।


जब चाहा पूछना मुह मोड़ने का सबब ।
मुह मोड़ के बोले हम लोग ख़ानदानी हैं।
====शिवराज=======

मंगलवार, 17 फ़रवरी 2015

रात का दर्द



मैं हूँ रात 
बड़ी बेमानी सी 
हो गयी हूँ आजकल 
किसी को भी 
पहले की तरह् 
अब इंतज़ार नहीं है
मेरा 
अब तो काले कारनामे तक 
दिन के उजाले में 
होने लगे हैं 
अँधेरे अपना अस्तित्व 
बिजली की रौशनी में
कहीं खोने लगे हैं 
---शिवराज------