शनिवार, 6 दिसंबर 2014

मेरे दिल के खिड़की दरवाज़े तो तब से बंद हैं
जब से अंदर आकर उसने कुंडी लगा दी थी
~~~~~शिवराज~~~~~~~

गुरुवार, 4 दिसंबर 2014

देखते हैं


जब भी देखते हैं क्या बात देखते हैं
हसींन और हंसी एक साथ देखते हैं
अच्छे से देखी है हमने सारी दुनियां
तुझ में कुदरत की करामात देखते हैं
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तेरी हस्ती ने ही निखारी है ये दुनियां
बड़ी ही खूबसूरत और प्यारी दुनियां
मेरी दुनियां है अब तुम्हारी दुनियां
अब जिंदगी हम तेरे साथ देखते हैं
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तू है मौजूद तो कुछ है मेरा वजूद
वरना जीने की तम्मना कहाँ थी
अब मरने से डर मुझको लगे है
हम अपने बदलते जज़्बात देखते हैं
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तू मिला है तो जैसे कहीँ खो गया मैं
क्या था और क्या हो गया हूँ मैं
अब तो कहने लगे हैं मेरे अज़ीज़
तुझे आज कल बहुत कम देखते हैं

~~~~~शिवराज~~~~~~~

मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

एक बात/ Ek Baat


गम ढूँढोगे तो गम ही मिलेगा
ख़ुशी ढूँढोगे तो ख़ुशी मिलेगी
तलाश किसकी है ये तय करो
वो आज नहीं तो कल मिलेगी
~~~~~ शिवराज~~~
Gum dhoondhoge togum hi milega
Khushi dhoondhige to khushi milegi
Talash kiski hai ye tay kero
Vo aaj nahi to kal milegi

~~~~~Shivraj~~~~~~~